गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) के लिए इन बातों का रखें ख़ास ध्यान, तभी आएगी अच्छी फसल

0
142
गोभी की खेती
गोभी की खेती

गोभी एक ऐसी सब्जी है, जो कि गर्मी और सर्दी दोनों में पाई जाती है. इसकी पैदावार को देखते हुए गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) पूरे वर्ष की जाती है. आम तौर पर गोभी की दो किस्में पाई जाती हैं- फूल गोभी और पत्ता गोभी. इने से फूल गोभी की खेती भारत में सबसे अधिक की जाती है. कम पैसों में यदि आप भी अच्छी खासी आमदनी पाना चाहते हैं तो गोभी की खेती आपके लिए सबसे उत्तम विकल्प साबित हो सकती है. इसे दुनिया भर में सब्जी, सूप और आचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. प्रोटीन युक्त गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) सर्दियों में गर्मियों की तुलना में अधिक लाभ होता है.
आज के इस लेख में हम आपको फूल गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) से जुडी कुछ ख़ास बातें बताने जा रहे हैं, जिनके चलते आप अच्छी फसल की पैदावार कर सकते हैं.

गोभी (Gobhi ki Kheti) के लिए जलवायु

गोभी की खेती के लिए गर्म और सर्द, दोनों ही जलवायु सर्वोत्तम माने गए हैं. लेकिन यदि खेती (Gobhi ki Kheti) के दौरान जलवायु में ठंड और पाला जरूरत से अधिक हो तो फूल झड़ जाते हैं जिससे काफी नुक्सान हो सकता है. ऐसे में शाकीय वृद्धि के समय तापमान अनुकूल से कम होने पर फूलों का आकर छोटा पड़ जाता है. आम तौर पर अच्छी गोभी की पैदावार के लिए 15-20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान को उत्तम माना गया है.

गोभी (Gobhi ki Kheti) की उन्नत किस्में

गोभी की किस्मों में फूलगोभी को विभिन्न भागों में वर्गीकृत किया गया है. किसी भी प्रकार की गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) के लिए तापमान की अनुकूलता बहुत मायने रखती है. गोभी की उत्तम किस्में निम्नलिखित हैं-
अगेती किस्में : अर्ली कुंआरी, पूसा कतिकी, पूसा दीपाली, समर किंग, पावस, इम्प्रूब्ड जापानी.
मध्यम किस्में : पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा स्नोबाल, के.-1, पूसा अगहनी, सैगनी, हिसार नं.-1.
पिछेती किस्में : पूसा स्नोबाल-1, पूसा स्नोबाल-2, स्नोबाल-16.

गोभी की खेती(Gobhi ki Kheti) के लिए भूमि

गोभी की खेती के लिए किसी भी तरह की भूमि अच्छी साबित हो सकती है. लेकिन अच्छे जल निकास के लिए दोमट या बलुई दोमट भूमि को गोभी की खेती गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) के लिए सबसे बढिया माना गया है. ऐसी मिट्टी में जीवांश की मात्रा काफी अधिक होती है इसलिए यह गोभी की पैदावार के लिए सहायक साबित होती है. ऐसी भूमि का pH स्केल 6.5 से 7.5 के मध्य रहता है. इसके खेती के लिए आप पहले एक खेत तैयार कर लें और फिर तीन से चार बार पाटा मार कर भूमि को समतल कर लें.

गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) में खाद एवं सिंचाई

अच्छी उपज के लिए हर मौसम में फसल को कुछ पौषक तत्वों की आवश्यकता होती है. ऐसे में गोभी की खेती (Gobhi ki Kheti) के लिए भूमि में 35-40 क्विंटल गोबर की सदी खाद एवं नीम की 1 क्विंटल खली डालें और 15 दिनों के बाद वर्मी वाश का सिस्स्तेमाल करें. रोपाई के बाद अब सिंचाई के लिए 10-15 दिन तक का इंतज़ार करें ताकि भूमि में नमी की कमी ना हो.
यह भी जानें:- मशरूम की खेती

5 (100%) 2 votes

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here