जासूस अजीत कुमार डोभाल से जुड़े कुछ अनसुने रहस्य

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अजीत डोभाल

एक ऐसा भारतीय जो पाकिस्तान को एक और मुंबई के बदले बलूचिस्तान छिन लेने की चेतावनी देने से भी परहेज़ नहीं करता, एक ऐसा जासूस जो सात साल तक पाकिस्तान में मुसलमान बन कर अपनी देश की रक्षा के लिए तत्पर रहा. अजीत डोभाल ( Ajit Doval ) ने कभी भी अपनी जान की परवाह नहीं की और अपनी जान को जोखिम में डाल कर देश की सेवा में हमेशा प्रतिबद्ध रहा. अजीत डोभाल ( Ajit Doval ) का चयन 1968 में केरल क़ैडर से बतौर आईपीएस के रूप में हुआ था, इसके बाद साल 2005 में यह इंटेलीजेंस ब्यूरो के चीफ़ पद से रिटायर हुए.

अजीत डोभाल की प्रारंभिक शिक्षा

अजीत डोभाल जी का जन्म 20 जनवरी 1945 में उत्तराखंड के पौडी में एक गढ़वाली परिवार में हुआ. इनकी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से हुई इसके बाद इन्होने आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया. एमए की पढ़ाई पूरी करते ही यह आईपीएस की तैयारी में जुट गये और अपनी कड़ी मेहनत के पश्चात यह सफल हुए तथा 1968 में केरल क़ैडर से बतौर आईपीएस के रूप में चयनित हुए.

अजीत डोभाल जी के कुछ अनसुने और हैरान कर देने वाले कारनामे

डोभाल जी के लिए अक्सर कहा जाता है कि उनका दिमाग़ चाणक्य जैसा है और हौसला शिवाजी जैसा है. भारत में आक्रामकता लाने के लिए अजीत डोभाल जी का बहुत बड़ा हाथ है. 6 साल तक पाकिस्तान के लाहोर वहाँ की आर्मी में मार्शल की पोस्ट तक पहुँचे तथा बिना किसी के शक के घेरे में आए वह चुप-चाप अपना कार्य करते रहे और भारत को पाकिस्तान से जुड़ी कईं ख़ुफ़िया जानकारी भेजते रहे. वह भारत के इतिहास के अब तक के सबसे सफल जासूस हैं. जब 1987 में खालिस्तानी युद्ध ज़ोर पकड़ रहा था तो उस समय डोभाल पाकिस्तानी एजेंट बन कर दरबार साहिब पहुँचे और तीन दिन तक आतंकियों के साथ रह कर उनसे सारी गुप्त जानकारी हासिल की जिसके बाद इन्होने ‘ऑपरेशन ब्लॅक थंडर’ को सफलतापूर्वक पूरा किया.

अजीत डोभाल देश के पहले नॉन-आर्मी पर्सन हैं जिन्हें 1988 में कीर्ति चक्र मिला है. साल 2016 के सितंबर के महीने में अजीत डोभाल द्वारा रचित सर्जिकल स्ट्राइक ने भारत के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया. राइट विंग हिंदू संगठन स्वामी विवेकानंद फोरम की स्थापना भी अजीत जी ने ही की है. 2014 में इन्हें NSA ( Nation Security Advisor ) बनाया गया और यह आज भी अपनी सेवायें अपने देश को प्रदान कर रहे हैं.

अजीत डोभाल जी का कहना है यदि सरकारें हौसला दिखायें तो वह आतंकवाद का जड़ से ख़ात्मा कर देंगे और बाहारी देशों से मिलने वाली धमकियों का मुँहतोड़ जवाब देने से कतराएँगे नहीं.

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