दुनिया के सात अजूबे – देखें तस्वीरें

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दुनिया के सात अजूबे

दुनिया के सात अजूबे: धरती के निर्माण के बाद मनुष्य के दिमाग ने धीरे धीरे विकास करना शुरू किया. इस विकास के बाद मनुष्य ने दोबारा कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखा. आज के इस साइंस युग में ऐसी ढेरों इमारतें हैं, जो अपने आप में लाखों कहानियां और राज़ समोय हुए रहती है. इनमे से कुछ इमारतों का ढांचा इतना दिलकश बनाया गया है, कि उनकी ख़ूबसूरती को चाह कर भी नकारा नही जा सकता. आज हम आपको ‘दुनिया के सात अजूबे’ के बारे में बताने जा रहे हैं. जिन्हें लगभग आप सब ने किसी न किसी किताब में पढ़ा या देखा जरुर होगा.

दुनिया के सात अजूबे ऐसे सुन्दर प्राकृतिक और मानव द्वारा निर्मित संरचनाओं का प्रारूप है, जो मानव को हैरान करती हैं. दुनिया में ऐसी बहुत सी जगह है जो अपने आप में बहुत अद्भुत और प्रसिद्ध है. प्राचीन काल से 21वीं शताब्दी तक दुनिया के अजूबों की ऐसी कई विभिन्न सूचियां तैयार की गयी हैं. प्राचीन काल की कलाकारी और उनसे निर्मित स्मारक सुंदरता एक अद्भुत उदाहरण हैं और जिन्हें देख कर बहुत आश्चर्य होता है.

प्राचीन काल में दुनिया के सात अजूबे

1. गीज़ा के पिरामिड
2. बेबीलोन के झूलते बाग़
3. ओलम्पिया में जियस की मू्र्ति
4. अर्टेमिस का मन्दिर
5. माउसोलस का मकबरा
6. रोडेस कि विशालमूर्ति
7. ऐलेक्जेन्ड्रिया का रोशनीघर

21वीं शताब्दी से पहले यह सुन्दर इमारतें और स्मारक दुनिया के सात अजूबे की श्रेणी में सबसे ऊपर थी. प्राचीन काल की दुनिया के सात अजूबे की श्रेणी को दोबारा बनाया गया क्यूंकि इनमें से अधिकांश पुरानी इमारतें और स्मारक नष्ट हो चुके है. प्राचीन काल की इमारतों में से गीज़ा के पिरामिड अभी भी सात अजूबों की श्रेणी में सम्मिलित हैं. 2001 में स्विस कारपोरेशन न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन ने दुनिया भर में 200 स्मारकों और इमारतों के बीच 7 सबसे बेहतरीन इमारतें और प्राचीन स्मारक को चुनने की एक प्रतिस्पर्धा चलायी. सात अजूबों को चुनने के लिए पुरे विश्व भर से वोटिंग हुई. उस समय गीज़ा के पिरामिड को एक सम्माननीय प्रतिभागी मान कर प्रतियोगिता से अलग कर दिया गया और आज यह सात अजूबो में पहले स्थान पर मौजूद है. न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन के अनुसार उस समय लगभग 100 मिलियन से ज्यादा लोगों ने इस परियोजना के लिए अपने वोट फ़ोन और इंटरनेट से दिए. वोटिंग 2007 तक चली और लिस्बन में 7 जुलाई, 2007 को दुनिया के 7 अजूबे की घोषणा की गयी.

21वीं शताब्दी में दुनिया के सात अजूबे

1. ताजमहल
2. चीन की विशाल दीवार
3. चीचेन इट्ज़ा
4. कोलोसियम
5. क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा
6. माचू पिच्चू
7. पेत्रा

ताजमहल

ताज महल दुनिया के सात अजूबे में से पहला अजूबा है जो हमारे भारत में मौजूद है. यह 1632 में शाहजहाँ द्वारा दिल्ली के आगरा जिले में बनवाया गया था. इसकी ख़ूबसूरती और कलाकृति की तारीफ़ हर कोई करता है. असल में यह एक मकबरा है जो शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ की याद में बनवाया था. इस महल को संगमरमर से बनाया गया था इसलिए यह दिखने में सफ़ेद रंग का परी महल लगता है. कहा जाता है कि 15 सालों की कड़ी मेहनत के बाद इस महल को तैयार किया गया था. हैरानी वाली बात यह है कि ताजमहल के जैसा कोई दूसरा महल ना बनाया जा सके, इसलिए शाहजहाँ ने इसे बनाने वाले सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे. आज दुनिया के सात अजूबे की सूची में शामिल ताजमहल को देखने लाखों लोग रोज़ आते हैं.

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चीन की विशाल दीवार

चीन की दीवार अर्थात ‘द ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना’ दुनिया की सबसे बड़ी दीवार है जोकि लगभग 6400 किलोमीटर तक फैली हुई है. इस दीवार का निर्माण चीन में रहने वाले शासकों द्वारा राज्य की रक्षा के लिए करवाया गया था. शोध के अनुसार इस दीवार को 16वीं शताब्दी में बनाया गया था. यह दुनिया की सबसे मजबूत, विशाल दीवार है जिसे बाद में ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना के नाम से जाना जाने लगा. इस दीवार को बनाने के लिए उस समय में मिट्टी, पत्थर, ईंट और लड़की आदि का इस्तेमाल किया गया था. यह दिखने में एक किले की तरह लगती है जिसमे 10 से 15 लोग आराम से चल सकते हैं. बता दें कि दुनिया के सात अजूबे की सूची में शामिल यह दीवार चीन के दंदोग से शुरू हो कर पश्चिम लोप तक फैली हुई है.

दुनिया के सात अजूबे

चीचेन इट्ज़ा

मैक्सिको में मौजूद चिचेन इटजा या चिचेन इत्ज़ा को माया मंदिर भी कहा जाता है. यह सदियों पुराना मंदिर है जिसका निर्माण लगभग 600AD में हुआ था. इस मंदिर को दुनिया के सात अजूबे की लिस्ट में शामिल किया गया था. मंदिर की खासियत इसमें बनी सीढियां है. यह सीढियां चारों दिशायों को दर्शाती है. इसकी हर दिशा में 91 सीढियां है. यानि कुल मिला कर चेचेन इत्ज़ा मंदिर में 365 सीढियां है जो एक वर्ष को दर्शाती हैं. मंदिर में एक बड़ा चबूतरा बनाया गया है साथ ही इसमें हज़ार स्तम्बो का हाल एवं कैदियों के खेल का मैदान है. यह माया मंदिर लगभग 5 किलोमीटर तक फैला हुआ है जिसकी ऊँचाई तकरीबन 69 फीट है.

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कोलोसियम

रोम के इटली शहर में बसा कोलोसियम स्टेडियम दुनिया के सात अजूबे की सूची में शामिल है. इसका निर्माण 72 AD में ही शुरू हो गया था लेकिन इसे बनने में काफी साल लगे और आखिरकार यह 80AD में पूरी तरह से तैयार कर दिया गया. यह स्टेडियम रोम की सुन्दरता को चार चाँद लगाता है. ओवल के आकर में बना स्टेडियम कंक्रीट और रेट से बनाया गया था. हालाँकि एक समय में भूकंप से इसकी बनावट में काफी अंतर आ गया था लेकिन आज भी इसकी सुन्दरता में कोई कमी नहीं है. इस स्टेडियम की खासियत यह है कि इसमें एक ही समय में 80 हज़ार से अधिक लोग बैठ सकते हैं. यह 24 हज़ार वर्ग मीटर में बनाया गया है जिसमे जानवरों की लड़ाई, खेल कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं. इसके जैसी ईमारत बनाने के लिए कईं लोगों ने कोशिश की लेकिन आज तक इसकी बनावट का तोड़ कोई भी इंजिनियर नहीं निकाल पाया है.

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क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा

दुनिया के सात अजूबे की इस लिस्ट में अगला नाम क्राइस्ट द रिडीमर का आता है. यह ब्राजील देश के रियो डी जेनेरियो में स्तिथ है. दरअसल यह येशु मसीह यानि जीसस क्राइस्ट की एक 38 मीटर की प्रतिमा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 130 फीट है. इस मूर्ति का निर्माण 1922 में किया गया था. यह मूर्ति कंक्रीट और पत्थरों से मिला कर तैयार की गई थी जिसका औसतन भार 635 टन के करीब है. यह कोरकोवाडो के पहाड़ी इलाके में मौजूद है. इसे 12 अक्टूबर 1931 को यहाँ स्थापित किया गया था.

दुनिया के सात अजूबे

माचू पिच्चू

अमेरिका के पेरू में मौजूद माचू पिच्चु एक ऊंची चोटी पर मौजूद शहर है. इसकी ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 2430 मीटर ऊंची है. दुनिया के सात अजूबे में इसका नाम भी शामिल है. इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में किया गया था. ऐसी मान्यता है कि इस शहर में इंका सभ्यता रहा करती थी, 100 साल बाद स्पेन ने जब उन पर जीत हासिल की तो वह इस जगह को छोड़ कर चले गए. जिसके बाद यह सभ्यता नष्ट हो गई साथ ही यह जगह भी विलुप्त हो गई. इसके बाद अमेरिका के हीर्म बिंघम ने इसकी खोज की.

दुनिया के सात अजूबे

पेत्रा

पेट्रा दुनिया के सात अजूबे की सूची में आता है. यह साउथ जॉर्डन में मौजूद है. जॉर्डन एक बेहद इतिहासिक शहर माना गया है. पेट्रा की कलाकृति को लाखों लोग देखने आते हैं. इसका निर्माण चट्टानों को काट कर किया गया था. पेट्रा में पानी की एक नालीनुमा प्रणाली है जिसके कारण यह देश भर में प्रसिद्धि का कारण बनी रहती है. लाल रंग की इस ईमारत का निर्माण 312BC में हुआ था. इस ईमारत में कईं ऊंचे मंदिर, तालाब, नहरे मौजूद हैं, जो इसे अन्य इमारतों के मुकाबले अधिक ख़ास बनाते हैं.

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