पंचतंत्र की कहानियाँ

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पंचतंत्र की कहानियाँ

पंचतंत्र की कहानियाँ

पंचतंत्र की कहानियाँ हमें जीवन का व्यवहारिक पाठ पढ़ाती है. पंचतंत्र की कहानियों की रचना का इतिहास भी बड़ा ही दिलचस्प है. इन कहानियों में से एक प्रसिद्ध कहानी “व्यापारी का पतन और विकास” है. 2000 साल पहले धोबीनगर में एक बहुत ही मेहनती व्यापारी रहता था. धोबीनगर का राजा इंद्रदेव व्यापारी के कार्य से बहुत ही खुश था, और इसलिए उसने उसे राज्य का प्रशासक बना दिया. नगर के सभी लोग व्यापारी के कार्य से बहुत ही प्रसन्न् थे. कुछ समय बाद व्यापारी ने अपनी बेटी का विवाह करवाया, उसने विवाह में धोबीनगर के सभी लोगों को आमंत्रित किया. व्यापारी ने राजा और उनके परिवार को भी आमंत्रित किया. उसने सभी के लिए भोज का प्रबंध भी कर रखा था. खाने के समय उसने सभी को सम्मान और उपहार भी दिए.

राजमहल का एक सेवक जो महल में सफाई का काम करता था, वह भी इस विवाह में शामिल था. मगर गलती से वह एक ऐसी कुर्सी पर बैठ गया जो राज परिवार के लिए रखी थी, यह देखकर व्यापारी क्रोधित हो गया और उसने सेवक की गर्दन पकड़ कर उसे विवाह समारोह से धक्के दे कर बाहर निकलवा दिया. सेवक व्यापारी के इस व्यवहार से बहुत आग – बबूला हो गया. सेवक ने व्यापारी को सबक सीखाने की योजना बनाई.

अगले दिन सेवक राजा के कक्ष में सफाई करने गया उसने राजा को अर्धनिद्रा में देख कर बड़बड़ाना शुरू किया: “इस व्यापारी की यह मजाल की वह रानी के साथ दुर्व्यवहार करे”. राजा यह सुन कर जाग गया और सेवक से पूछा कि क्या यह सब सच है? तब सेवक राजा के चरण में गिरा और कहने लगा कि कल रात में वह जुआ खेल रहा था तो मेरी नींद पूरी नहीं हुई है इसलिए मैं कुछ भी बड़बड़ा रहा हूँ. राजा को सेवक की बात सुन कर व्यापारी पर शक हुआ. राजा ने व्यापारी को महल से निकाल दिया.

अगले दिन जब व्यापारी राजमहल में आया तो सेनिकों ने उसे अंदर जाने से रोक दिया. तभी सेवक वहाँ से गुज़र रहा था उसने ये सब देखा और कहा कि तुम ये क्या कर रहे हो? क्या तुम इन्हें नहीं जानते ये बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं और तुम्हें बाहर फिंकवा सकते हैं, जैसा इन्होंने मेरे साथ अपने भोज में किया था. यह सुनते ही व्यापारी को सारी बात समझ आ गयी.

अगले दिन व्यापारी ने सेवक को अपने घर बुलाया और उसे सम्मान के साथ खाना खिलाया साथ में उपहार भी दिए. व्यापारी ने सेवक से माफी भी माँगी. सेवक यह सब देख के बहुत खुश हुआ. उसने व्यापारी को माफ़ कर दिया. सेवक ने व्यापारी से कहा की वह राजा से उसका सम्मान वापिस दिलवाएगा.

अगले दिन सेवक राजा के कक्ष में सफाई करने गया. उसने राजा को अर्धनिद्रा में देखा और बड़बड़ाने लगा “हे भगवान, हमारा राजा तो ऐसा मूर्ख है कि वह स्नान गृह में खीरे खाता है”. यह सुनकर राजा क्रोधित हो गया, और सेवक से कहा ये तुम क्या बोल रहे हो? सेवक फिर से राजा के चरणों में जा गिरा और माफी माँगने लगा और दोबारा कभी न बड़बड़ाने की कसम खाई. राजा ने सोचा कि अगर सेवक मेरे बारे में ग़लत बोल सकता है तो वह व्यापारी के बारे में भी ग़लत बोल सकता है. अगले दिन राजा ने व्यापारी को फिर से प्रशासन लौटा दिया.

शिक्षा

इस कहानी(पंचतंत्र की कहानियाँ) से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें छोटे ओर बढ़ों का सम्मान करना चाहिए. हमें ये हमेशा याद रखना चाहिए कि जैसा व्यवहार हम दूसरों के साथ करेंगे वैसा व्यवहार हमारे साथ भी होगा. सुनी सुनाई बातों पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए.

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