पारद शिवलिंग साधना की महिमा है अद्भुत, स्वयं भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

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पारद शिवलिंग
पारद शिवलिंग

पारद शिवलिंग साधना: हिंदू धर्म में भगवान शिव को महाकाल के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि जब महाकाल किसी भक्त से प्रसन्न होते हैं तो उसकी जीवन की काया पलट देते हैं और उसके सभी दुखों का नाश कर देते हैं. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पूजन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. वैसे तो आज के समय में मार्किट में कईं तरह के शिवलिंग उपलब्ध हैं लेकिन इनमे से पारद शिवलिंग को सबसे उत्तम माना गया है. ऐसी मान्यता है कि पारद शिवलिंग साधना से भगवान शिव मनुष्य के सभी दुखों का अंत कर देते हैं और उसे सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है. इस लेख में हम आपको पारद शिवलिंग साधना का महत्व और पारद शिवलिंग की पहचान बताने जा रहे हैं.

पारद शिवलिंग का महत्व

शास्त्रों में शिवलिंग पूजन को शिव की पूजा करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका बताया गया है. पारद शिवलिंग का महत्व और लाभ अनेकों हैं. पारद शिवलिंग शुद्ध धातु पारे से बनाया जाता है जो ठोस होने के बावजूद भी द्रव्य रूप में रहता है. इसलिए इसे कुछ लोग रसराज भी कहते हैं. पुरातन धर्म ग्रंथों के अनुसार पारद शिवलिंग में स्वयं भगवान शिव वास करते हैं इसलिए जो भी भक्त सच्चे मन पारद शिवलिंग साधना करता है, उसे शिव भक्ति का फल प्राप्त होता है. पारद शिवलिंग का महत्व इतना अद्भुत है कि यह घर में हर बुरी शक्ति के वास को दूर कर सकता है.

पारद शिवलिंग की पहचान

पारद शिवलिंग साधना
पारद शिवलिंग साधना

प्राचीन ग्रंथों में पारद को सिद्ध धातु कहा गया है. इस शिवलिंग का वर्णन हमे चरक संहिता जैसे कईं ग्रंथों में मिलता है. शुद्ध धातु से बनाया गया पारद शिवलिंग हमे शिव के हृदय के करीब लाने में सहायता करता है. आज के इस मिलावटी दौर में हर व्यक्ति लालची बन चुका है. यहाँ तक कि अब बाज़ार में नकली पारद शिवलिंग खुलेआम बिक रहे हैं. इसलिए इस शिवलिंग को खरीदने से पहले इसकी पहचान होना बेहद आवश्यक है. बता दें कि पारद शिवलिंग पारे अर्थात मर्करी से बना होता है. लेकिन बाजर में एल्युमीनियम से बने शिवलिंग को पारद शिवलिंग कह कर बेचा जा रहा है. दिखने में यह दोनों एक जैसे ही लगते हैं लेकिन असली पारद शिवलिंग में कम से कम 70% पारा, 15% मैग्नीशियम तथा 10% कार्बन तथा 5% पोटैसियम कार्बोनेट(अंगमेवा) होता है.

पारद शिवलिंग बनाने की विधि

पारद शिवलिंग पारे, कार्बन और मनिफेन से मिल कर बनाया जाता है. यह विशेष अध्ययन और महाअनुभवों द्वारा तैयार किया जाता है. पारद शिवलिंग बनाने की विधि बेहद आसान है लेकिन इसे विशेषज्ञों की मदद के बिना नही बनाया जा सकता. बात दें कि इस शिवलिंग को बनाने के लिए तरल अवस्था में मौजूद पारे को पहले ठोस अवस्था में लाया जाता है. इसके लिए इसमें सोना, चांदी, तांबा जैसे रसायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं. इस शिवलिंग को तैयार करने के लिए तापमान का स्तर काफी उच्च रखा जाता है. उच्च तापमान में पारे को पिघला कर स्वर्ण और ताम्र के साथ मिला कर शिवलिंग का आकार दिया जाता है.

पारद शिवलिंग की कीमत

पारद शिवलिंग की कीमत इसमें मिलाए जाने वाले रसायनिक तत्वों पर निर्भर करती है. इसमें जितना अधिक सोना- चांदी होगा, उतना ही अधिक इसका दाम होगा. इसलिए बाज़ार में इसको इसके भार के हिसाब से भी बेचा जाता है. एक अच्छा एवं शुद्ध पारद शिवलिंग 11000 रुपए से लेकर 1 करोड रुपए तक का हो सकता है. अलग अलग जगहों पर इनकी कीमतों में थोडा अंतर देखने को मिल सकता है.

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