मटर की खेती (Matar ki Kheti) के लिए जलवायु, भूमि और उर्वरक से जुडी संपूर्ण जानकारी

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मटर की खेती
मटर की खेती

मटर एक शीतकालीन सब्जी है जो कि सब्जी, फास्ट फूड और कई प्रकार के व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती है. मटर के डिब्बा बंदी भी देश भर में लोकप्रिय है. इसमें भारी मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटैशियम और विटामिन पाए जाते हैं. देखा जाए तो मटर स्वाद और पौष्टिकता दोनों में ही सबसे उत्तम माना गया है. भारत में मटर की खेती (Matar ki Kheti) व्यवसायिक रूप से की जाती है. यदि आप भी खेती में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं तो मटर की खेती आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. आज के इस लेख में हम आपको मटर की खेती का महत्व, उसके लिए जरूरी जलवायु, भूमि और उर्वरक के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके लिए आगे चल कर मददगार साबित हो सकते हैं.
लेकिन इससे पहले हम आपको बता दें कि मटर के हरे पौधों का प्रयोग जानवरों के चारे व खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह एक प्रकार की फलियों की प्रजाति है जिसका सूखे दानों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. देखा जाए तो मटर रबी की एक प्रमुख दलहनी फसल है जिस की खेती (Matar ki Kheti) विश्व भर में सवार्धिक तौर पर की जाती है. मटर की खेती के लिए जरूरी जलवायु भूमि और पूर्वक के बारे में जानकारी निम्नलिखित है-

मटर की खेती (Matar ki Kheti) के लिए जरूरी जलवायु

यदि आप मटर की खेती करने का विचार बना रहे हैं तो आप की जानकारी के भी हम आपको बता दें कि भारत में मटर का उत्पादन सबसे अधिक है. यह 7.9 लाख हेक्टेयर भूमि में आसानी से उगाए जा सकते हैं. वहीं जलवायु की बात करें तो मटर की खेती (Matar ki Kheti) के लिए नम और ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है. इसी कारण हमारे भारत देश में मटर की खेती रबी की ऋतु में की जाती है. जिन जगहों पर वार्षिक वर्षा 60 से 80 सेंटीमीटर तक होती है वहां आप मटर की खेती आसानी से कर सकते हैं. इसकी वृद्धि के लिए कम तापमान की आवश्यकता होती है. लेकिन पाले के कारण फसल को हानिकारक प्रभाव पड़ सकते है. मटर के बीज का अंकुरण करने के लिए न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक अनिवार्य है.

मटर की खेती (Matar ki Kheti) के लिए भूमि

मटर एक फलीदार फसल है इसलिए इसकी खेती के लिए भूमि बेहद मायने रखती है. इसकी खेती के लिए मटियार दोमट तथा दोमट भूमि अति उत्तम मानी गई है. ऐसी भूमि का पीएच मान 6.5 से 7.5 के मध्य में रहता है. इसलिए क्षारीय एवं अम्लीय मृदा में फसल की अच्छी वृद्दि नहीं हो पाती. मटर की खेती (Matar ki Kheti) में दोमट मिट्टी का जल निकास में भी अहम किरदार होता है. इसलिए आप दोमट मिट्टी में इस फसल की खेती आसानी से कर सकते है.

मटर की खेती (Matar ki Kheti) में उर्वरक

किसी भी फसल की अच्छी उपज के लिए खाद एवं उर्वरक का अहम किरदार होता है. ऐसे में मटर की खेती के लिए 20 टन खूब सड़ी गोबर की खाद, 25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-70 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश युक्त उर्वरक प्रति हेक्टेयर देना बेहतर रहता है. इस खेती में नाइट्रोजनयुक्त खाद व् उर्वरक का स्थिरीकरण गांठों के निर्माण में हानि पहुंचाता है.
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