मन की शाँति कैसे पाएँ |

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मन की शाँति के उपाय

आज के आधुनिक समाज में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं जो तनाव मुक्त हो. बड़े ही नहीं अपितु बच्चों को भी तनाव ने अपना शिकार बनाया है. शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो ये दावा कर सके कि वह पूरी तरह तनाव मुक्त है. आज हर कोई मन की शाँति पाना चाहता है.

अशांत मन के कारण :-

अशांत मन का प्रमुख कारण है आज की जीवन शैली. आजकल लोग बहुत ज़्यादा व्यावहारिक हो गए हैं. लोग अपनी काया को ही सबकुछ मानने लगे हैं. आत्मा और परमात्मा के बीच के सम्बन्ध को तो जैसे लोग भूल ही गए हैं. विज्ञानं के इस युग मे आधुनिकता की ओर बढ़ने वाला मनुष्य अपने नैतिक मूल्य भूलता जा रहा है. आज एक व्यक्ति खुद को ऊँचा उठाने के लिए सौ व्यक्तियों को रोंदने के लिए तैयार बैठा है. यही कारण है की आज भौतिक संसाधनों से तो सभी बहुत खुश है लेकिन मन की शाँति की तलाश मे रहते हैं.

क्या आपका मन आपका कहना मानता है??

अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि वह व्यक्ति बहुत शक्तिशाली या पावरफुल है या फिर कहते सुना होगा कि पावरफुल लोगों से सम्भन्ध बनाए रखने चाहिए. कौन है ये पावरफुल या शक्तिशाली लोग? लोग पावरफुल उसे कहेंगे जिसके कहने पर काम हो जाते हैं या जिसका कहना दुनिया मानती है लेकिन परमात्मा कहते है कि पावरफुल वो है जिसका कहना वो खुद माने या जिसका मन उसका कहना माने. जिस व्यक्ति के पास मन को काबू करने कि शक्ति है उसके जीवन में अशांति नहीं आ सकती. क्रोध, भय, ईर्ष्या इत्यादि ये सभी मनुष्य की बीमारियां हैं लेकिन आजकल के समाज में इन्हे साधारण कह दिया गया है. इन बीमारियों से मनुष्य अपने स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि अपने रिश्तों को भी ख़राब कर देता है. और यही बीमारियां मन की अशांति का मुख्य कारण है.

मन की शाँति के उपाय:-

मन को शांत करने के लिए उसे संतुलित करना बहुत ज़रूरी है. मन तभी संतुलित होगा जब हम अपने विचारों को नियंत्रित करेंगे. कभी-कभी हम छोटी सी बात को घंटो बैठ कर सोचते रहते हैं. कभी-कभी न चाहते हुए भी मन में वह बात आ ही जाती है जिसे हम नहीं सोचना चाहते. यह तभी होता है जब हमारे विचार हमारे नियंत्रण में नहीं है तथा मन असंतुलित है.

मन को संतुलित करने का एक अहम् उपाय है फोकस करने की कोशिश करना. जो बीज हवाओं के साथ यहां वहां घूमते हैं वो कभी विशाल पेड़ नहीं बन सकते. ध्यान लगाने से या मैडिटेशन करने से फोकस करना संभव हो सकता है. यदि मैडिटेशन करते हुए अपने मन को पूरी तरह परमात्मा पर फोकस किआ जाए तो अपने विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है तथा जीवन में सकारात्मकता लाई जा सकती है.

लेकिन हम यह भी जानते है कि मन चंचल है. ध्यान करते समय हमारा शरीर तो राम राम का जाप करता है लेकिन मन चारों दिशाओं में भ्रमण कर रहा होता है. यह इसलिए होता है क्यूंकि हमने मन को कोई काम ही नहीं दिया है और मन कभी खाली नहीं बैठ सकता वह कुछ न कुछ अवश्यस सोचेगा. इसलिए पूरी तरह फोकस करने के लिए हमे अपने शरीर के साथ साथ मन को भी कोई दिव्य कार्य देना होगा जिसे हमारे योग में रूप ध्यान कहा गया है. अर्थात यदि हम राम का नाम ले रहे हैं तो अपने मन में राम की तस्वीर लेकर आनी चाहिए. इससे हमारा मन उसी तरफ जाएगा जिसे हम बार-बार सोचेंगे.

मन को एक जगह केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं. और ऐसा करने के लिए हमे प्रतिदिन अभ्यास करने की आवश्यकता है. ध्यान करते हुए हमे कई मुश्किलें आएगी लेकिन हमे यह अपने मन की शांति के लिए करना होगा. जब जब हमारा मन इधर उधर भटकने की कोशिश करे उसे वापस खींच लाओ और परमात्मा पर केंद्रित करो. यही अभ्यास बार-बार करने से हम ज़रूर सफल होंगे और यही संघर्ष हमे हमारी मंज़िल तक पहुंचाएगा.

इस अभ्यास को करने के परिणाम हमे तुरंत नहीं मिल सकते. यदि एक महीना अभ्यास करने से हमे तीस प्रतिशत परिणाम मिला है तो हमे अपना ह्रदय न हारते हुए अभ्यास जारी रखना है और इसी अभ्यास से एक दिन हम अपने मन की शाँति को प्राप्त करने में सफल होंगे. इसका परिणाम ये होगा कि किसी भी परिस्थिति में हमारा मन वैसी ही प्रतिक्रिया देगा जैसी हम चाहेंगे अर्थात हमारे मन पर हमारा नियंत्रण हो पाएगा.

जिसने अपने मन को वश में कर लिआ है,
उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते||
-गौतम बुद्ध

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