महान कवि कालिदास की जीवनी और उनसे जुड़े रोचक तथ्य

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महान कवि कालिदास की जीवनी
महान कवि कालिदास की जीवनी

भारत देश की जन्म भूमि संत और महापुरुषों की जन्म भूमि रही है. यहाँ जब भी पाप बढ़ा है, तब तब कोई न कोई महान शख्सियत ने जन्म लिया है. इन्ही में से आज हम आपको जिस महान व्यक्ति की जिंदगी के बारे में बताने जा रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि महान कवि कालिदास हैं. इस लेख में हम आपको इस महान कवि कालिदास की जीवनी और उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे. आज के समय में कालिदास जी को एक प्रसिद्ध कवि और नाटककार के रूप में जाना जाता है. चलिए जानते हैं आखिर ये कौन थे और इन्हें कवि बनने की जिज्ञासा कैसे हुई?

महान कवि कालिदास की जीवनी – परिचय

कालिदास जी एक महान कवि और नाटककार थे. उन्होंने अपनी जिंदगी में कईं कल्याणकारी विचारों को रचनाओं का रूप दिया. लोगों के अनुसार कालिदास जी संस्कृत भाषा के विद्वान थे. उन्होंने अपनी उच्च सोच के माध्यम से लोगों को नई दिशा देने की कोशिश की. उनके साहित्य रुचि का अंदाजा लगा पाना भी कठिन है. मान्यता है कि संत कालिदास जी माँ काली के परम भक्त थे. यहाँ तक कि उनके नाम के शाब्दिक अर्थ”काली की सेवा करने वाला” है. वह अपनी कविताओं को लेकर इतने सजीदा थे कि कोई भी उनके विचारों की ओर झट से आकर्षित हो जाता था. मनमोहक कालिदास जी एक समय में राजा विक्रमादित्य के दरबार के 9 रत्नों में शामिल थे.

महान कवि कालिदास की जीवनी – जन्म काल

संस्कृत विद्वान कालिदास जी के नाम को लेकर कईं प्रकार की धारणाएं प्रचलित हैं. उनके जन्म काल और स्थान के बारे में आज तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है. मान्यता के अनुसार कालिदास जी का जन्म 150 ई. पू. से 450 ई. पू. में हुआ था. उन्होंने द्धितीय शुंग शासक अग्निमित्र को नायक बनाकर “मालविकाग्निमित्रम्” नाटक लिखा था इसलिए उनके जन्म का अनुमान 170 ई.पू. का लगाया जाता है. इसके इलावा छठी सदी के बाणभट्ट की प्रसिद्द रचना “हर्षचरितम्” में भी उनके जन्म का उल्लेख किया गया है. सभी तथ्यों को देखते हुए उनका जन्म काल प्रथम शताब्दी से तीसरी शताब्दी के बीच में माना जाता है.

महान कवि कालिदास की जीवनी – राजकुमारी विद्योत्मा से विवाह

कालिदास जी के बारे में मान्यता है कि वह बचपन से ही अनपढ़ थे लेकिन बाद में उन्होंने संस्कृत और हिंदी साहित्य का ज्ञान हासिल किया. कालिदास जी का विवाह राजकुमारी विद्योत्मा से हुआ जोकि एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थी. उस समय राजकुमारी ने ऐलान किया था कि जो भी उन्हें शास्त्रार्थ में हरा देगा, वही उनका पति बनेगा. इसके बाद कालिदास जी उनकी चुनौती पर खरे उतरे. जब भी राजकुमारी विद्योत्मा उनसे कोई गूढ़ सवाल पूछती तो कालिदास जी मौन संकेतों के द्वारा ही उनका जवाब देते थे. एक बार उदहारण के लिए जब राजकुमारी ने उन्हें हाथ दिखाया तो उन्हें लगा कि वह उन्हें थप्पड़ मारने की धमकी दे रही है जिसके जवाब में उन्होंने राजकुमारी को घूँसा दिखा दिया. लेकिन राजकुमारी विद्योत्मा को लगा कि कालिदास उन्हें पांचो इन्द्रियों का संकेत दे रहे हैं इसलिए वह उनसे शादी करने को तुरंत राज़ी हो गई.

महान कवि कालिदास की जीवनी – कवि बनना

राजकुमारी से संयोग से शादी होने के बाद जब उन्हें कालिदास जी की मंद बुद्धि के बारे में पता चला तो वह काफी दुखी हुई और गुस्से में उन्होंने कालिदास जी को धित्कार कर घर से निकाल दिया और कहा कि जब तक वह सच्चे पंडित नहीं बनते, तब तक वह वापिस नहीं लौट सकते. जिसके बाद कालिदास जी ने विद्या प्राप्ति की सोची और घर से निकल पड़े. माँ काली के आशीर्वाद से वह एक दिन साहित्य के परम ज्ञानी बन गए. आज भी उनकी गणना महान और सर्वश्रेष्ठ कवियों में की जाती है.

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