देखिए राजस्थान के मेहन्दिपुर बालाजी में कैसे दिया जाता है प्रेत आत्माओं को ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’

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मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

राजस्थान का मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( mehndipur balaji ) का मंदिर प्रेत-आत्माओं से ग्रसित और उनके प्रकोप से परेशान लोगों को प्रेतों से छुटकारा दिलाने के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है. इस मंदिर में हनुमान जी के उद्घोष और जयकारे लगाकर भूतों से निज़ात दिलाई जाती है. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehandipur Balaji Mandir ) में हमेशा भक्तों डेरा लगा रहता है, भक्त अपनी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए और मंदिर में हनुमान जी के बाल रूप के दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं. यह मंदिर इतिहास में काफ़ी महत्वता रखता है. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehndipur Balaji ) में हनुमान जी की बाल रूप की एक मूर्ति विद्यमान है, जिसके दर्शन मात्र से भक्तों के सब संकट दूर हो जाते हैं. हनुमान जी अपने भक्तों को कभी संकट में नहीं देख सकते अतः उन्हें संकटमोचन भी कहा जाता है. Mehndipur Balaji मंदिर राजस्थान के करौली डिस्ट्रिक्ट के तोडाभिम में स्थित है. यह जयपुर से लगभग 66 किलोमीटर दूर है. Mehndipur छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा हुआ है और अति सुंदर स्थान पर स्थित है.

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehndipur Balaji Mandir ) के कुछ सख़्त नियम भी हैं जिनका पालन सभी श्रद्धालुओं और यात्रियों को करना ही पड़ता है

1. मंदिर परिसर में यह साफ तौर पर बताया दिया जाता है कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehndipur Balaji Mandir ) में किसी भी पंडित, औझा या किसी तांत्रिक के द्वारा भूत-प्रेत को नहीं झाड़ा जाता. यहाँ सभी बाधाओं को बालाजी महाराज स्वयं दूर करते हैं अतः पीड़ित श्रद्धालु किसी भी प्रकार के झाँसे में ना फसे.
2. वहाँ ठहरने वाले श्रद्धालुओं को चाहिए कि वह जब तक मंदिर परिसर में ठहरते हैं तब तक वह ब्रह्मचर्य का पूरी तरह से पालन करें, माँस, मदिरा आदि का सेवन बिल्कुल ना करें.
3. श्रद्धालुओं को चाहिए कि जिन प्रेत से ग्रसित लोगों को मार पड़ती हो उन लोगों के आस-पास की जगह खाली कर दें.
4. मंदिर से मिले प्रसाद का कतयी अनादर ना करें, अर्थात प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण करें और अपने परिजनों में भी वितरित करें.
5. सभी श्रद्धालुओं को प्रेतराज सरकार के दरबार में जाना चाहिए तथा पूजा में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं डालना चाहिए.

आख़िर कौन हैं प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान?

बालाजी महाराज के साथ-साथ यहां श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान ( भैरव) भी विराजते हैं. यहाँ श्री प्रेतराज सरकार दंडाधिकारी के पद पर आसीन हैं वहीं दूसरी ओर भैरव जी कोतवाल के पद पर आसीन हो कर अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बनाए हुए हैं.

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