लाल किला का रहस्य आप में से 99% लोग नहीं जानते होंगे, जानिए क्या है इस जगह की सच्चाई

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लाल किला का रहस्य
लाल किला का रहस्य

लाल किला एक ऐसा किला है, जिसे किसी भी परिचय की जरूरत नहीं है क्यूंकि यह भारतीय इतिहास की एक शानदार धरोहर है जोकि दिल्ली शहर में मौजूद है. लाल किला पिछले कईं सालों से सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है. जो भी व्यक्ति आगरा का ताज महल देखने जाता है, वह एक बार इस किले में भी जरुर जाता है. लाल किले के वजूद के बारे में देश का हर बच्चा बच्चा वाकिफ है लेकिन क्या आप लाल किले के बारे में सच में सब कुछ जानते हैं? हमारे भारत के इलावा इस दुनिया में जितने भी किले है, उसके बारे में हम केवल उतना ही जानते हैं, जितना हमे इतिहासकारों द्वारा बताया गया है. लेकिन इन जगहों में ऐसे कईं राज़ दफन होते हैं, जिन्हें दुनिया से छिपा के रखा जाता है. इन्ही में लाल किला भी एक ऐसा ही ऐतिहासिक स्थल है. आज हम आपको लाल किला का रहस्य बताने जा रहे हैं, जिससे शायद आप भी वाकिफ नहीं होंगे.

लाल किले का रहस्य – किले का निर्माण

आपने आज तक लाल किले का ज़िक्र कईं किताबों में पढ़ा होगा. इन किताबों के अध्ययन से आपको यही लगता होगा कि पुरानी दिल्ली में लाल पत्थर से निर्मित यह लाल किला मुगल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था. जबकि यह तथ्य सच नहीं है. इस किले को साल 2007 में यूनेस्को द्वारा विश्व ध्रोहित स्थल घोषित किया गया था. लेकिन लाल किले को लेकर अलग-अलग इतिहासकारों की अलग अलग मत हैं. जानकारी के अनुसार जब लाल किला निर्मित किया गया, उस समय शाहजहाँ का जन्म भी नहीं हुआ था. मान्यता के अनुसार इस किले को शाहजहाँ से सैंकड़ों सालों पहले महाराज अनंगपाल तोमर दृतीय ने बनवाया था.

लाल किले का रहस्य – निर्माण के बाद हुआ था शाहजहाँ का जन्म

बता दें कि महाराज अनंगपाल महाभारत के अभिमन्यु के वंशज थे और साथ ही वह पृथ्वीराज चौहान के नाना भी थे. लाल किले के बारे में बताया जाता है कि इस किले का वर्षों पहले नाम “लाल कोट” हुआ करता था. लेकिन 1060 ईसवीं में दिल्ली शहर को बसाने के लिए इसका निर्माण किया गया था. हालाँकि देखा जाए तो शाहजहाँ का जन्म किले के निर्माण के वर्षों बाद यानि 1592 में हुआ था. ऐसे मे यह किला उनके जन्म के वर्षों पहले ही अपनी होंद कायम कर चुका था.

लाल किला का रहस्य – अकबरनामा में मौजूद है सच

कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना था कि मुस्लिम शाहजहाँ एक समय में लाल किले को तबाह करना चाहता था इसके विषय में वह कईं बार किले को नष्ट करने की नाकामयाब कोशिशें भी कर चुका था. इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ 3) में लेखक लिखता है कि, “सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क-ए-लाल (लाल प्रासाद/महल) की ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया!”

इतना ही नहीं बल्कि अकबरनामा और अग्निपुराण में भी इस बात का साफ़ वर्णन मौजूद है कि लाल किले का निर्माण महराज अनंगपाल ने करवाया था. हालाँकि इन सब बातों में कितना सच है और कितना नहीं, इस बारे में साफ़ तौर पर विज्ञान भी कुछ नहीं कह पाया है. लेकिन आज भी लोग लाल किले को शाहजहाँ के नाम के साथ जोड़ते हैं.

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