लौकी की खेती (Lauki ki Kheti) से जुड़ी ख़ास जानकारियां

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लौकी की खेती
लौकी की खेती

ताजगी से भरपूर लौकी को हरी सब्जियों में सबसे उत्तम माना जाता है. इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की प्रचुर मात्र के चलते यह हमारे पेट को साफ़ रखती है साथ ही पाचन प्रणाली को दरुस्त रखती है. यदि आप पढ़ाई लिखाई करने के बाद भी बेरोजगार हैं तो लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) आपके लिए अपने व्यवसाय का सबसे सरल उपाय है. लौकी की खेती कम इंवेस्टमेंट में हो सकती है जिसके कारण इससे अच्छा ख़ासा मुनाफा कमाया जा सकता है. आम तौर पर लौकी की खेती पहाड़ी इलाकों से लेकर भारत के दक्षिण राज्यों में की जाती है.

लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) के लिए जलवायु

यदि आप लौकी की खेती करने के इच्छुक हैं तो इसके लिए आपको इसकी पैदावार और जलवायु से जुडी जानकारी होना बेहद आवश्यक है. बता दें कि लौकी की खेती जायद और खरीफ दोनों ही मौसमों में की जा सकती है. लौकी के बीजों को जमने के लिए और पौधों की पैदावार के लिए सामान्य तापमान 32 से 38 सेंटीग्रेड होता है. यानि लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) के लिए गर्म एवं आद्र जलवायु सबसे उत्तम है. वहीँ अधिक बरसात भरे दिन इसकी खेती को नुक्सान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में भारत में फरवरी से लेकर जून तक का समय लौकी की खेती के लिए अच्छा रहता है.

लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) के लिए मिट्टी

यूँ तो लौकी की फसल हर प्रकार की भूमि में की जा सकती है लेकिन अच्छे एवं प्रचुर जल निकास के लिए लौकी की खेती करने के लिए दोमट मिट्टी को उत्तम माना गया है. दरअसल, दोमट मिट्टी का pH स्केल 6.5 से 7.5 के बीच रहता है जिसके कारण इसमें लौकी की पैदावार अच्छी खासी हो सकती है.

लौकी की किस्में (Lauki Ki Kheti)

लौकी की खेती
लौकी कम बजट में कमाई का एक सबसे बढिया रास्ता है. इसकी कईं सारी किस्में हैं लेकिन यदि आप अच्छी किस्म की लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) करना चाहते हैं तो बता दें कि पूषा समर लॉन्ग और पंजाब लॉन्ग इसकी बेहतरीन किस्मों में से एक हैं. पूषा समर लॉन्ग वर्ष और गर्मी, दोनों ऋतुओं में अच्छी उपज देती है. इसके साथ ही इस किस्म की बेल पर अधि फल लगते हैं जोकि 40-50 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इसकी उपज आप 70065 क्विंटल प्रति एकड़ कर सकते हैं. वहीँ दूसरी और पंजाब लॉन्ग भी लौकी की अच्छी किस्म है जोकि बड़ी मात्रा में उपज देती है. इसके फल अंगूरी किस्म के होते हैं और लंबे समय तक ताज़े रहते हैं. इनकी उपज 150 क्विंटल प्रति एकड़ है.

लौकी की खेती (Lauki Ki Kheti) का तरीका

लौकी की खेती में बोआई सबसे अहम किरदार इभाती है. आप गर्मी में 15-25 फरवरी के बीच इसकी बोआई कर सकते हैं जबकि खरीफ में आप इसकी बोआई 15 जून से 15 जुलाई तक कर सकते हैं. इसके लिए गर्मी के मौसम में 2.5-3-5 मीटरव बारिश के मौसम में 4-4.5 मीटर की दूरी पर 50 सेंटीमीटर चौड़ी व 20 से 25 सेंटीमीटर गहरी नालियां बना लें. अब इनके किनारे पर गर्मी में 60-75 सेंटीमीटर एवं वर्षा में 80-85 सेंटीमीटर के फासले पर बीजों की बोआई कर दें. याद रहे कि 1 जगह पर 2 से 3 बीज लगभग4 सेंटीमीटर की गहराई पर हो.

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