वृन्दावन दर्शनीय स्थल देखने हर साल आते हैं लाखों लोग, जानिए क्या है इनकी खासियत

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वृन्दावन दर्शनीय स्थल
वृन्दावन दर्शनीय स्थल

वृन्दावन दर्शनीय स्थल: मथुरा में मौजूद वृन्दावन दर्शनीय स्थल एक ऐसा स्थान है, जो भगवान श्री कृष्ण की लीला को दर्शाता है. वृन्दावन दर्शनीय स्थल को कृष्ण की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. हर साल कृष्ण भगवान के जन्म दिन के मौके पर यहाँ लाखों श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है. वृन्दावन एक ऐसी जादुई नगरी है जो कईं छोटे बड़े मंदिरों से भरी पड़ी है. कृष्ण भक्तों का आकर्षण द्वार वृन्दावन सबको अपनी और खींचता है. यहाँ के कण कण में राधा कृष्ण की रास लीला समाई हुई है.
वृन्दावन दर्शनीय स्थल को लेकर एक पुरानी कहावत काफी प्रचलित है- “जहाँ के कण कण में बसे हो श्याम वो श्री वृन्दावन धाम, जहा पल पल भक्तो की रक्षा राधे करे वो है श्री वृन्दावन धाम.” आज हम आपको वृन्दावन दर्शनीय स्थल के कुछ लोकप्रिय मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपनी ख़ूबसूरती और राधे-कृष्ण के प्रेम को बखूबी दर्शाते हैं.

बांके बिहारी मंदिर

बांके बिहारी मंदिर
बांके बिहारी मंदिर

वृन्दावन दर्शनीय स्थल में बांके बिहारी मंदिर सबसे प्रमुख मंदिर है. कहा जाता है कि वृन्दावन के इस मंदिर के दर्शन किए बिना भक्तों की यात्रा अधूरी रह जाती है. बांके बिहारी को स्वामी हरिदास महाराज जी ने वृन्दावन के निविधन में प्रकट किया था इसलिए पहले बांके बिहारी की सेवा इस निधिवन में की जाती थी. इस मंदिर का निर्माण सन् 1864 में गोस्वमियों के सहयोग से करवाया गया था तब से लेकर आज तक बांके बिहारी इस मंदिर में विराजमान हैं. शरद पूर्णिमा, कृष्ण जन्माष्टमी, हरियाली तीज आदि शुभ मौकों पर याहन बांके बिहारी के विशेष दर्शनों का आयोजन किया जाता है. लेकिन मंगला आरती याहन साल में केवल एक बार यानि जन्माष्टमी पर ही की जाती है.

प्रेम मंदिर

प्रेम मंदिर
प्रेम मंदिर

वृन्दावन दर्शनीय स्थल में प्रेम मंदिर स्वयं राधा और श्री कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है. यह मंदिर ऐसा मंदिर है, जिसे बनाने में करीबन 11 साल का वक़्त लगा था. वहीँ इसे बनाने में सौ करोड़ रुपए से अधिक धन राशि खर्च हुई थी. इस मंदिर का ढांचा इटालियन संगमरमर से बनाया गया है. इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज जी ने करवाया था. मंदिर के अंदर एक विशाल हाल बनवाया गया है जहाँ एक साथ एक ही वक़्त में 25000 लोग आराम से बैठ सकते हैं. संध्या में मंदिर पर पड़ने वाली रौशनी देखने लायक होती है. मंदिर में बने बगीचे में तरह तरह की लीलाएं श्री कृष्ण से जुडी हुई प्रतीत होती हैं.

सेवा कुंज

सेवा कुंज
सेवा कुंज

वृन्दावन के दर्शनीय स्थल में सेवा कुंज का ख़ास महत्व है. इसे गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा प्रकट किया गया था. इस मंदिर में श्री राधिका के चित्रपट की पूजा की जाती है. इस चित्र में स्वयं श्री कृष्ण राधाजी के चरणों की सस्व कर रहे हैं. आज के समय में भी जब श्री राधा माधव यहाँ विहार करते हैं तो रात में किसी भक्त को अंदर परवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती. यहाँ तक कि रात्रि में बबंडर, पशु-पक्षी भी स्वयं ही बाहर निकल जाते हैं. यहाँ की एक झांकी का वर्णन कुछ इस प्रकार है- “देख्यो दुरयो वह कुंज कुटीर में, बैठयो पलोटत राधिका पायन”। बता दें कि इस जगह जब श्री कृष्ण को रास लीला करते समय जब ललिता जी को प्यास लगी तो कृष्ण भगवान ने अपनी मुरली से प्रकट किया था.
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