सहदेवी का पौधा है लाभकारी, ऐसे करें इसकी पहचान

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सहदेवी का पौधा
सहदेवी का पौधा

सहदेवी का पौधा: दुनिया में लगभग लाखों किस्मों के पौधों की विभिन्न-विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं. इन्ही में से सहदेवी का पौधा भी एक ऐसा कोमल पौधा है जिसमे कईं दिव्य गुण मौजूद हैं. हिंदू धर्म के शास्त्रों में इस पौधे को सबसे उत्तम कहा गया है. इसलिए इस पौधे को ‘देवी’ शब्द की उपाधि दी गई. यह पौधा कईं औषधीय गुणों से भरपूर है जिसके कारण अभूत से रोगों को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इस पौधे का इस्तेमाल करते हैं. गौरतलब है कि सहदेवी का पौधा टोने-टोटकों में भी प्रभावी है इसलिए लोग इस पौधे को घरों में उगाते हैं.

बता दें कि सहदेवी एक प्रकार की बूटी है, जिसकी पत्तियां तुलसी की पत्तियों की तराह ही पतली होती हैं. इसका परिक्ष छत्ता होता है जबकि इसके फूल सफ़ेद रंग के होते हैं. यह आम तौर पर बलुई मिट्टी पर पाया जाता है.

सहदेवी के टोटके

सहदेवी का पौधा पूर्णिमा पर घर लाना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसे में पूर्णिमा से एक दिन पहले सूर्यास्त के समय आप सहदेवी के पौधे को घर आने का निमंत्रन देकर आएं और अगली सुबह इसे सूर्यादय से पूर्व स्नान करके के बाद लेने जाएँ. पौधे को उखाड़ने से पहले इसका गंगाजल से स्नान करवाएं और फिर घर ला कर पंचामृत से स्नान करा कर षोडशोपचार पूजन करें.

  • सहदेवी का पौधा घर लाने के पश्चात इसकी सिद्ध की गई जड़ को लाल एवं रेशमी कपडे में लपेट कर घर की तिजोरी में रखें. इससे घर में कभी भी धन की कमी नहीं आएगी.
  • रसोईघर में ‘सहदेवी का पौधा’ रखना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं आती.
  • घर में बने मंदिर अथवा पूजन स्थान पर सहदेवी का पौधा रखें. इससे घर में सुख शांति बनी रहती है और वास्तु दोषों से मुक्ति मिलती है.

सहदेवी पौधे के लाभकारी उपाय

सहदेवी का पौधा ना केवल टोने टोटकों के लिए बेहतर है, बल्कि यह पौधा एक उत्तम आयुर्वेदिक औषधि भी है जो कईं रोगों का रामबाण इलाज करने के काम आता है.

अतिसार में उपयोगी

जो लोग अतिसार लोग से पीड़ित हैं, उनके लिए सहदेवी का पौधा सबसे उत्तम औषधि साबित हो सकता है. इसके लिए सहदेवी के पौधे की जड़ लें और उसको सात टुकड़ों में बाँट कर लाल धागे के सहारे कमर में बाँध लें. इससे आपका अतिसार रोग कुछ ही समय में ठीक हो जाएगा.

संतान प्राप्ति में सहायक

यदि कोई महिला चाह कर भी संतान का सुख हासिल नहीं कर पा रही, तो सहदेवी का पौधा उसके लिए लक्ष्मी माँ का वरदान साबित हो सकता है. इसके लिए इस पौधे को सुखा कर चूर्ण तैयार कर लें. अब इस चूर्ण को गाय के घी के साथ महावारी के पांच दिन पहले और माहावारी के पांच दिन बाद सेवन करें. इसे शीघ्र ही आपको संतान की प्राप्ति होगी.

लीवर संबंधित रोगों से छुटकारा

बिगड़े खान पान की आदतों के चलते बहुत से मनुष्य पेट और लीवर संबंधित समस्याओं से ग्रसित है. लेकिन सहदेवी का पौधा लीवर की हर बीमारी को ठीक करने में मददगार है. इसके लिए सहदेवी के पौधे का काढ़ा बना कर नियमित रूप से सुबह खाली पेट पीएं.

सहदेवी का पौधा

सहदेवी की पहचान

सहदेवी का पौधा गुणों से भरपूर है. ऐसे में सहदेवी की पहचान करने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि यह पौधा बालू वाली मिट्टी के क्षेत्र में पाया जाता है. इसके फूल सफेद होते हैं और इतने कोमल होते हैं कि हाथ लगाएं भी झड़ सकते हैं. यह एक छोटा सा कोमल पौधा है ज्सिकी ऊंचाई 1 से 3 फुट तक की हो सकती है.

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