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जिगोलो | पुरुष वेश्याओं का सच | क्या है जिगोलो मार्किट दिल्ली का सच?

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जिगोलो
India Gigolo Market in Delhi,
जिगोलो | पुरुष वेश्याओं का सच | क्या है जिगोलो मार्किट दिल्ली का सच?
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जिगोलो यानी पुरुष वेश्याएं. जी हाँ अपने बिकुल सही पढ़ा पुरुष वेश्याएं. सुनकर काफ़ी अटपटा लग रहा होगा, लेकिन आज आपके और ह्मारे बीच में बहुत जिगोलो रहते हैं जिनका शायद आपको पता भी न हो ना ही चल पाए. वेश्यावृति का व्यवसाय विषव में सबसे पुराना व्यवसाय माना जाता है. वेश्यावृति का ये बाज़ार आपके और ह्मारे जन्म से भी बहुत पहले से चल रहा है. अपने भी स्त्री वेश्याओं के बारे में पढ़ा या सुना ज़रूर होगा. वेश्यावृति के इस बाज़ार में स्त्री वो खिलोना है जिसे पुरुष अपनी वासना मिटाने के लिए प्रयोग करता है और अपनी वासने मिटने पर उसे पैसे देकर छोड़ देता है. सदियों से चले आ रहे इस बाज़ार में स्त्रियों का वेश्या होना लाजमी है लेकिन, पश्चिमी सभ्यता के बढ़ावे और आधुनिकता के नाम पर वेश्यावृति के इस वायव्साय में अब शायद महिलायें ही काफ़ी नही.

क्या है जिगोलो मार्किट दिल्ली का सच?

पश्चिमी सभ्यता और समुदाय के अनुसार मर्द जब चाहे अपनी वासना मिटाने के लिए किसी वेश्या का सहारा ले सकता है लेकिन स्त्रियाँ अपना मन मारकर क्न्हा जाए. इसलिए एक्नाए ववसाय का जानम हुआ जिसे जिगोलो या पुरुष वेश्याएँ भी कहा जा सकता है. दिल्ली और मुंबई समेत कई बड़े शहरों में मर्दों के जिस्म का कारोबार बड़ी तेजी से फल-फुल रहा है। इसे जिगोलो मार्केट के नाम से भी जाना जाता है।

जिगोलो मार्किट दिल्ली

शाम होते ही जिगोलो मार्किट सज जाती है जिगोलो का इस्तेमाल महिलाएँ अपनी वासना पूर्ति के लिए करती हैं. महिलाओं की तरहा ही वेश्यावृति के बाज़ार से पैसे कमाना पुरुषों के लिए भी आम हो गया है. जिगोलो यानी की पुरुष वेश्याओं के लिए तो ये कम एसा है की आम के आम ओर गुटलियों के भी दाम. परंतु इसके पीछे की एक सचाई ये भी है कि, कई लोगों से शारीरिक संबंध बनाने से इन पुरुष वेश्याऊँ को एड्स (एक यौन संक्रमित रोग) भी हो जाता है. इन पुरुष वेश्याओं का अधिकतर प्रयोग विद्वाओं या उन महिलाओं द्वारा किया जाता है जिनको किसी कारण अपनी पति से यौन सुख नहीं मिलता. पच्छिमी सभ्यता के कदमों पर चलने वेल भारतीय युवाओं का इस व्यवसाय में उतरना जंगल में आग की तरहा फैला, क्यूंकी युवाओं को इस कम में कोई मेहनत भी नज़र नहीं आती और अची ख़ासी कमाई भी हो जाती है. कुछ युवा ग़रीबी और बेरोज़गारी के चलती भी ये पेशा अपना लेते हैं.

जिगोलो मार्किट दिल्ली की उत्पत्ति

पश्चिमी देशों की नकल करना तो भारतीय युवाओं के लिए एक फैशन बन चुका है, और युवाओं के लिए पैसा कमाना जिंदगी से बढ़कर हो गया है तो ऐसे में वो किसी कम को घिनोना या बुरा नहीं मानते. युवाओं के लिए पैसा कमाना जिंदगी से बढ़कर हो गया है तो ऐसे में वो किसी कम को घिनोना या बुरा नहीं मानते. गौर किया जाए तो समाज में पुरुष वेश्याओं के आने का कारण भी हमारा समाज ही है. क़ानून की नज़र में ये व्यवसाय मान्य नही है और स्त्री वेश्यावृति की भाँति ही इसे भी गैर क़ानूनी माना जाता है.

क्या है जिगोलो मार्किट दिल्ली का सच? देखें वीडियो

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